7 Best Hindi Short Stories With Moral

आज मैं आप लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से बताने जा रहा हूँ Hindi short stories with moral for kids; इस Kids story in Hindi को पढ़कर आपको रहस्य, रोमांच और जादू का ऐहसास होगा.

यहाँ पर दी जा रही Moral stories in Hindi short काल्पनिक है, इसे सिर्फ मनोरंजन के लिए लिखा गया है; इससे किसी व्यक्ति, वस्तु और जगह से कोई संबंध नहीं; आप इस Short stories in Hindi को सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन के लिए पढ़ें. यह हर वर्ग के लोगों को पसंद आएगी; तो चलिए बिना देर किए हम इस Hindi short stories with moral को पढ़ना शुरू करते हैं.

hindi short stories with moral for kids
Moral Stories In Hindi For Kids

यह Hindi short stories for kids रहस्य, रोमांच, जादू और चमत्कारी घटनाओं से भरपूर लंदन शहर से दूर एक विरान जगह पर रहने वाले एक बड़ी जागीर के मालिक के गुलाम के जीवन संघर्ष पर आधारित है.

यह गुलाम एक बहादुर, साहसिक और मासूम बच्चा है जिसका नाम टॉल्जी है; इस मासूम बच्चे का न कोई दोस्त, न कोई रिस्तेदार और न ही कोई चाहने वाला है. यह बच्चा जागीर परिवार की गुलामी करता है; और इसके बदले उसे मिलता है – नफ़रत और फटकार.

लोग कहते हैं कि एक चिंगारी को शोला में बदलते देर नहीं लगती; ठीक उसी तरह टॉल्जी भी एक चिंगारी है जो शोला में बदलना चाहता है; शायद इसिलिए गुलामी भरे जीवन में वह सपनों के सागर में गोता लगाता है.

वह दुनिया में नाम कमाना चाहता है; और दुनिया का सबसे अमीर, ताकतवर व सुपरमैन के जैसा आलौकिक शक्तियों वाला हीरो बनना चाहता है ताकि इस दुनिया में हो रहे जुल्म और आतंक को मिटा सके.

टॉल्जी गुलाम है लेकिन सपने बड़े हैं; बड़ी सोच है; कुछ कर गुजरने का जज्बा है; कुछ हासिल करने का जुनून है और जुल्म व आतंक से टकराने की हिम्मत है.

क्या टॉल्जी की दिली ख्वाहिश पूरी हो जाएगी? यदि हाँ तो कैसे? क्या है, उसकी गुलामी भरी जिंदगी की दास्तान?

Read Hindi Short Stories With Moral – हमदर्द भूत की तलाश

जागीर मालिक जिसका नाम है ‘मिस्टर रॉबलेट’ अपने तानाशाह अंदाज में छड़ी पटकते हुए टॉल्जी (मासूम गुलाम) के कमरे तक आया और किसी भड़के हुए सांड की तरह दहाड़ा – ‘निकम्मे टॉल्जी! बाहर आओ….. ;’

एक ही आवाज़ में दरवाजा धड़ाम से खुल गया; डर से काँपता हुआ एक मासूम, दुबला-पतला, लाल बालों और नीली आँखों वाला एक लड़का मिस्टर रॉबलेट के सामने खड़ा था.

‘हालांकि तुम मुझे अच्छी तरह से जानते हो;’ रॉबलेट ने अपना गुस्से से तमतमाया हुआ चेहरा टॉल्जी के बिल्कुल करीब लाते हुए अड़ियल सांड की तरह फुफकार, ‘फिर भी तुम ढीठ होते जा रहे हो…. मैंने तुमसे कितनी बार कहा कि सूरज उगने से पहले उसे खाना दे दिया करो पर तुम हो कि सुनते ही नहीं.’

‘मैं उसे भोजन देने हरगिज़ नहीं जाऊँगा! ’ टॉल्जी ने सहमी हुई आवाज में कहा, ‘मैं मरना नहीं चाहता हूँ…. मालिक! म-म-म-मैं जीना चाहता हूँ और अपने सपने को पुरा करना चाहता हूँ.’

‘बेवकूफ़ हो क्या?’ रॉबलेट ने कर्कश आवाज़ में कहा, ‘शायद तुम्हें नहीं पता….गुलाम के सपने कभी हकीकत नहीं होते – समझें? जाओ – और उसे भोजन दो!’

‘न-न-न-नहीं, मालिक! ’

‘जाओ!’

‘अगर उसने मुझे दबोच कर मार दिया तो? ’

‘तो क्या फर्क पड़ता है; ’ रॉबलेट ने कुटिलता से मुस्कुराते हुए कहा, ‘हम कोई और गुलाम ढूंढ लेंगे! ’

हर रोज की तरह आज भी टॉल्जी को मौत के मुँह में जाने के लिए मजबूर कर दिया गया. वह तेजी से भवन से निकला और घनघोर जंगल की तरफ चल दिया जो मौत का समन्दर है.

‘मेरी किसी को परवाह नहीं -’ टॉल्जी भन्नाते हुए जंगल की तरफ बढ़ रहा था, ‘होगी भी क्यों – मैं हूँ ही क्या – एक गुलाम! मेरे मरने से किसी को क्या फर्क पड़ता है…. मैं हूँ ही क्या – एक गुलाम! ’

आपको यह Hindi short stories with moral को पढ़ना कैसा लग रहा? यदि यह Short stories in Hindi पढ़ना पसंद आ रहा है तो चलिए इस कहानी में हम आगे बढ़ते हैं –

टॉल्जी के कदम जंगल में पड़ते ही एक विचित्र आवाज सुनाई दी और वह पीछे की तरफ लड़खड़ाया; यह विचित्र आवाज एक पक्षी की थी जो टॉल्जी के सर के ऊपर से पंख फड़फड़ाते हुए गुजर गया.

टॉल्जी ने अपने अंदर हिम्मत जुटाई और झाड़ियों के पीछे छुपी सुरंग की सीढ़ियों से नीचे उतरा; सुरंग में जलती मशालों से रोशनी हो रही थी जो स्टैंड में दिवारों पर लगी थीं. टॉल्जी धुँध भरी गली से होते हुए सदियों पुराने तहखाने में पहुँचा.

डर के मारे उसका गला सुख कर काँठ हो गया था; हालांकि उसे उम्मीद नहीं थी कि वह बाहर निकल पाएगा या नहीं; फिर भी वह आगे बढ़ता जा रहा था क्योंकि बाहर निकलने और न निकलने में कोई फर्क नहीं पड़ता.

जाहिर है अगर टॉल्जी बिना काम किए घर लौट जाए तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी और उसे भूखा मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा; टॉल्जी अपने भगवान को याद करते हुए मशालों की रोशनी से भरे तहखाने में आगे बढ़ता जा रहा था.

और अंत में उसके कदम दहशत भरे अंदाज में मोटी सलाखों के बाहर जम गये. उसने आज जो देखा; उसे देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गयीं – उसने सलाखों के अन्दर कैद खूँखार और विशालकाय अजगर को गुनगुनाते देखा.

जैसे ही अजगर की निगाह टॉल्जी पर पड़ी; वह लहराते और फुफकारते हुए उसकी तरफ तेजी से लपका पर मूर्खतापूर्ण ढंग से उसका सिर बेतहाशा सलाखों से टकराया और वह कुछ समय के लिए फर्श पर पसर गया.

मुझे उम्मीद है कि आपको यह Hindi short stories with moral को पढ़ते समय साहस का एहसास हो रहा होगा, हैना? और क्यों नहीं टॉल्जी जैसे मासूम गुलाम को खतरे का सामना करते हुए देखकर किसी में भी साहस आ जाएगा; चलिए इस Hindi short stories for kids में आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि टॉल्जी के साथ उस तहखाने में क्या हुआ?

Kids Story In Hindi – टॉल्जी मौत के तहखाने से बाहर कैसे आएगा ?

टाल्जी तेजी से साँस लेते हुए दहशत के मारे धड़कते दिल के साथ तहखाने की दीवार से टिक गया. जब अजगर होश में आया तो उसने उसकी तरफ कातिलाना अंदाज में फुफकारते हुए घूर कर देखा.

‘तुम मुझे इस तरह क्यों घूर रहे हो?’ टॉल्जी ने दहशत भरी आवाज में चीखा, ‘क्यों मारना चाहते हो, मुझे? आखिर क्या दुश्मनी है, तुम्हारी मुझसे?’

अजगर ने अपनी शक्तिशाली पूँछ तहखाने की दीवार पर खूँखार अंदाज में मारी जिससे पूरा तहखाना हिल गया.

‘भड़को मत! ’ टॉल्जी चीखा, ‘मैं तुम्हें भोजन देने आया हूँ और देकर चला जाऊँगा! ’

टॉल्जी भुनभुनाते हुए तहखाने में बने एक बड़े दड़बे की तरफ बढ़ा जिसमें से उसने अजगर के लिए ढेर सारे मुर्गे निकाले और उन सभी मुर्गों को एक-एक कर जैसे-तैसे सलाखों के अन्दर डाले; सिवाय एक मुर्गे के जो आखिरी मुर्गा होता था; वह आखिरी मुर्गे को इस लिए बचा लेता था ताकि अजगर उसका हाँथ न चबा ले.

शायद टॉल्जी के इसी व्यवहार की वजह से अजगर उससे नफरत करता था और उसे दबोच कर मारने की कोशिश भी करता था. जाहिर है, वह सोचता था कि अगर टॉल्जी को दबोचकर मार दूँगा तो भोजन देने कोई दूसरा आएगा जो मुझे पेट भर भोजन देगा.

मैं आशा करता हूँ कि आपको यह Hindi short stories with moral पसंद आ रहा होगा, क्यों? यदि हाँ तो आप इस Kids story in Hindi with moral को पढ़ना जारी रखें – क्या टॉल्जी मौत के तहखाने से बाहर निकल पाएगा या नहीं?

टॉल्जी अजगर को खाना देने के बाद बढ़ी हुई धड़कन के साथ भवन लौट आया और घड़ी की तरफ देखकर आह भरी. वह तेज कदमों के साथ लॉन में बैठे अपने मालिक के पास गया जो अपने पड़ोसी के साथ बैठकर सुबह की ठंडी हवा और सूरज की खिली धूप में चाय की चुसकियाँ ले रहे थे.

‘मालिक, मैंने उसे भोजन दे दिया,’ टॉल्जी ठंडे स्वर में बोला, ‘मालिक, आज फिर उसने मुझे दबोचकर मारने की कोशिश की! ’

‘चलो, भगवान का शुक्र मनाओ -’ जागिर मालिक रॉबलेट ने कुटिलता से मुस्कुराते हुए कहा, ‘कि तुम सही सलामत अपने पैरों पर खड़े हो वरना मैं सोच रहा था कि तुम-’

‘मर गए, है-ना मालिक? ’ टॉल्जी ने अधूरे वाक्य को पूरा किया.

‘तुम बहुत समझदार हो ¡’ जागिर मालिक रॉबलेट बोला और अपने पास बैठे पड़ोसी की तरह मुड़ा जो टॉल्जी को देखकर इस तरह नाक-भौं सिकोड़ रहा था मानों वह कोई बुरा बदबू हो, ‘तो मिस्टर पॉल्ड्रेन, हम कहा थें?’

‘यही कि गुलामों से अच्छी तरह गुलामी कराने की कितनी विधियाँ हैं?’ मिस्टर पॉल्ड्रेन यानी पड़ोसी ने टॉल्जी पर कहर बरपाती निगाह डालते हुए कहा, ‘और कितनी बनाई जा सकती है?’

मुझे आशा है कि आपको Hindi short stories with moral पढ़ने में मजा आ रहा होगा, क्यों? आप इस Kids story in Hindi को आगे पढ़ना जारी रखें ताकि आपको टॉल्जी के जीवन संघर्ष के बारे में अच्छे से पता चल सके; तो चलिए हम इस Hindi short stories with moral को पढ़़ना जारी रखते हैं –

Story In Hindi For Kids – टॉल्जी के स्कूल का अंतिम दिन

पड़ोसी के मुँह से इस तरह की बेतुकी बातें सुनकर टॉल्जी का चेहरा लाल सूर्ख हो गया और उसने मन में संकल्प लिया, ‘जिस दिन मैं अपने मकसद में कामयाब हो गया तो सबसे पहले मैं तुम दोनों का गला दबाऊँगा!’

‘अरे, तुम खडे़ क्यों हो?’ जागिर मालिक रॉबलेट ने व्यंग्य से मुस्कुराते हुए कहा, ‘तुम्हें स्कूल जाना है-ना?’

टॉल्जी ने हाँ में सिर हिलाया; और उसने अपने मालिक से फीस जमा करने के लिए पैसे मांगे जिस पर उसका मालिक भड़क उठा. टॉल्जी अपने मालिक की चीख सुनकर स्तब्ध खड़ा रह गया; वह पलटा और हताशा भरे भाव के साथ भवन के प्रवेश द्वार की तरफ चल दिया.

वह सुन सकता था कि जागिर मालिक रॉबलेट का पड़ोसी उस पर हँस-हँस कर कह रहा था, ‘यह पढ़ने भी जाता है – बड़ी अजीब बात है – एक गुलाम जिसे अपने मालिक के जूते चमकाने से फुर्सत ही नहीं मिलती और यह पढ़ने जाता है!’

‘बस, आज इसका अंतिम दिन है स्कूल में -’ जागिर मालिक व्यंग्यात्मक रुप मुस्कुराते हुए कहा और टॉल्जी के कदम सीढ़ियों से नीचे जम गए; वह अपने मालिक की पूरी बात सुनना चाहता था.

‘मतलब?’ जागिर मालिक रॉबलेट का पड़ोसी मिस्टर पॉल्ड्रेन ने सुअर की तरह मुँह बनाते हुए मतलब जानने की कोशिश की.

‘मतलब साफ है -’ जागिर मालिक ने और ज्यादा व्यंग्य से मुस्कुराते हुए कहा, ‘अगर आज इसने स्कूल में फिस जमा नहीं किया तो आज इसे स्कूल से धक्के मारकर निकाल दिया जाएगा.’

टॉल्जी तेजी से सीढ़ियां चढ़कर अंदर चला गया; वह अपने कमरे में इधर से उधर पैतरे खाँचते हुए स्कूल के लिए तैयार हुआ और अपना बैग उठाया और अपने पीछे दरवाजे को झटके से बंद किया; सीढ़ियों से नीचे उतरा; और तेज कदमों से भवन से दूर सूरज की लाल रोशनी में चमकती सड़क पर आ गया ताकि स्कूल जाने वाली बस छूट न जाये.

आपको यह Hindi short stories with moral को पढ़ना कैसा लग रहा है? अगर आपको यह Story for kids in Hindi को पढ़ना पसंद आ रहा है तो आप इस Kids story in Hindi को आगे पढ़ना जारी रखें ताकि आपको पूरी कहानी अच्छे से समझ में आये.

Stories For Kids In Hindi – स्कूल में टॉल्जी का अकेलापन

बस आयी और टॉल्जी लपककर चढ़ गया. बस हवा से बातें करते हुए शहर की तरफ चल दी. टॉल्जी हमेशा बस के ड्राइवर और कंडक्टर के दहशत में रहता था क्योंकि उनका चेहरा बिलकुल किसी बूढ़े चमगादड़ की तरह लगता था और कानफोडू जैसी आवाज में चीखते-चिल्लाते थे.

हर रोज की तरह आज भी टॉल्जी का दिन कुछ खास नहीं था क्योंकि कंडक्टर ने उसकी तरफ घूर कर देखा.

‘ओए!’ वह तेजी से टॉल्जी के पास आया और उसकी त्योरियाँ चढ़ी हुईं थीं; उसने तमतमा कर कहा, ‘पैसै लाया है या आज फिर फ्री में? ’

टॉल्जी ने इंकार में सिर हिलाया और हड़बड़ाकर सीट से नीचे उतर गया; उसने अपने चारों तरफ देखा. सभी बच्चे उसकी तरफ देख रहे थे जिनमें से कुछ तो मुस्कुरा रहे थे तो कुछ को टॉल्जी पर अफ़सोस हो रहा था.

क्या आपको इस Hindi short stories with moral को पढ़कर आपको साहस का एहसास हो रहा है – क्यों? यदि हाँ तो इस Story for kids in Hindi को ध्यान से पढ़ें क्योंकि आगे आपको साहस के साथ-साथ रहस्य और रोमांच का अनुभव होगा; तो चलिए हम इस शानदार Kids story in Hindi को पढ़ना जारी रखते हैं –

‘फिर तू यहाँ क्यों बैठा?’ कंडक्टर गला फाड़कर चीखा, ‘मैंने तुमसे कितनी बार बोला – अगर पैसे नहीं हैं – तो खड़े होकर चलो लेकिन तुम हो कि मानते ही नहीं!’

‘मैंने सोचा -’ टॉल्जी ने रुँधे गले से कहा, ‘कि – यह सीट -’

‘तेरे बाप की है – क्यों?’

‘नहीं-नहीं! मैंने ऐसा नहीं सोचा -’ टॉल्जी ने दहशत भरी आवाज में कहा, ‘मैं तो बस -’

‘अच्छा, चुप – दिमाग मत खा वरना -’ कंडक्टर ने झिंकते हुए कर्कश आवाज में कहा, ‘उठाकर चलती बस से नीचे फेंक दूँगा – निकम्मे कहीं के!’

टॉल्जी ने थूक निगला और अपने मन को समझाया कि वह अब कभी स्कूल नहीं आएगा क्योंकि उसे पैसे के नाम पर एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी; वह इसी उधेड़बुन में था कि इस एक जबरदस्त झटके के साथ बस रुकी.

अगर आप इस Hindi short stories with moral के साथ रहस्य और रोमांच की यात्रा करना चाहते हैं तो आप इस Short stories in Hindi को ध्यान से पढ़ते रहें.

Moral Of The Story In Hindi – क्या टॉल्जी सचमुच स्कूल छोड़ देगा?

‘चलो, नीचे उतरो – बच्चों,’ कंडक्टर ने ऊँची आवाज़ में कहा और नीचे उतरने में बच्चों की मदद करने लगा; खासकर उनकी जिन्हें वह पसंद करता था. बस में टॉल्जी ही ऐसा लड़का था जिसे वह खतरनाक तरीके से पसंद करता था.

‘ओए, खड़ा क्यों है – चल-चल नीचे उतर – वरना -’ कंडक्टर आगे कुछ कह पाता कि उससे पहले टॉल्जी बस से बाहर आ गया.

वह कल्पना कर रहा था – काश लोग मुझसे भी प्यार करते; मुझे पसंद करते; मेरे भी मम्मी-डैडी होते और एक अच्छा सा दोस्त होता तो कितना अच्छा होता!

‘जब तेरे पास पैसा नहीं है,’ टॉल्जी के पास से गुजर रहे एक लड़के ने कहा, ‘तो तू स्कुल क्यों आता है – तुम्हें घर का काम देखना चाहिए.’

‘ओह, कितना गरीब है!’

‘मुझे इस पर बहुत दया आती है!’

‘हाँ यार मुझे भी पर -’

‘हमारे क्लास टीचर भी इससे तंग आ गए हैं – ना जाने क्यों झेलते हैं – इसे!’

एक-एक कर सभी बच्चों ने कहा और व्यंग्य से मुस्कुराते हुए धक्के देकर निकल गएँ सिवाय एक बच्चे के जिसके बाल लाल और आँखें नीली थीं. टॉल्जी ने इस बच्चे को स्कूल में कभी नहीं देखा था.

मुझे उम्मीद है कि आपको यह Hindi short stories with moral अच्छा लग रहा होगा; यदि हाँ तो इस Kids story in Hindi को आगे पढ़ना जारी रखें –

वह लड़का फुर्ती से टॉल्जी के पास आया; एक पल के लिए टॉल्जी को लगा कि वह भी कोई व्यंगपूर्ण बात बोलेगा पर ऐसा नहीं किया बल्कि उसने टॉल्जी से हाँथ मिलाते हुए कहा, ‘अरे दोस्त, यहाँ क्यों खड़े हो – आओ, क्लास में चलते हैं – मैं नया हूँ इसलिए मेरा यहाँ कोई दोस्त नहीं – क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगे?’

मैं आशा करता हूँ कि आपको यह Hindi short stories with moral पसंद आ रहा होगा; यदि आप इस Kids story in Hindi को आगे पढ़ना चाहते हैं तो आप इस ब्लॉग पर बने रहेें; मैं बहुत जल्दी इस कहानी का अगला भाग लेकर आऊंगा; इस कहानी के कई भाग हैं; यदि आप, सभी भागों को पढ़ना चाहते हैं तो आप हमें कमेंट करें या हमें मेल करें info@angrejimasterji.com पर.

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